अपने पाठकों के मन को चोटिल करता हूँ अब आप पाठकगण ही बताये मैं क्या करूं। अपने पाठकों के मन को चोटिल करता हूँ अब आप पाठकगण ही बताये मैं क्या करूं।
मैं बस इतना ही कहना चाहूँगी लड़ो और आगे बढ़ो कभी बिचारी मत बनो। मैं बस इतना ही कहना चाहूँगी लड़ो और आगे बढ़ो कभी बिचारी मत बनो।
मेरी नज़र में तो मोबाइल एक समाजवादी तकनीकी उपकरण है, उसने पूंजीवाद की चूलें हिला दी है। मेरी नज़र में तो मोबाइल एक समाजवादी तकनीकी उपकरण है, उसने पूंजीवाद की चूलें हिला...
सोचती हूं मम क्यों छोड़ कर गया तुम ? इतना परेशान में ? सोचती हूं मम क्यों छोड़ कर गया तुम ? इतना परेशान में ?
उसकी सूनी पत्थराई आंखों में एक ही चेहरा था- जो अब जीवित नहीं हो सकता। उसकी सूनी पत्थराई आंखों में एक ही चेहरा था- जो अब जीवित नहीं हो सकता।
सहवास मधुर पलों का, विद्युत संचार का। सहवास मधुर पलों का, विद्युत संचार का।